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Saturday, April 12, 2014

muktak-tute hue sapane

टूटे हुये सपने भी अहसास छोड़ जाते हैं,
आँख से बहते आँसूं निशाँ छोड़ जाते हैं।
अपनों की बेवफाई से कैसा शिकवा ,
स्वार्थी कोई भी हों, रंग बदल जाते हैं।

डॉ अ कीर्तिवर्धन 

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