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Saturday, April 28, 2012

meri aawaz

मेरी आवाज़....
आवाज़ जो मुल्क की बेहतरी के लिए है
कोई दबा नहीं सकता|
दीवार जो मेरी आवाज़ रोक सके
कोई बना नहीं सकता|
जब जब चाहा जालिमों ऩे, आवाज़ दबी हो
किस्सा कोई बता नहीं सकता|
क़त्ल कर सकते हो जिस्म का ए कातिल
विचारों को कोई दबा नहीं सकता|
खिलेगा कोई फूल उपवन मे देखना उसको
खुशबु को कोई चुरा नहीं सकता|
कहाँ से पाला भ्रम अमर होने का,सियासतदानो
मौत से कोई पार पा नहीं सकता|
दबाओ के कब तलक मेरी आवाज़ दरिंदों
हवाओं को कोई बाँध नहीं सकता|
सजा कर एक परिंदा पिंजरें मे ,जाने क्या समझे
परिंदों से गगन खली रह नहीं सकता|
उड़ेगा बाज़ जब आसमाँ के सीने पर
मौत किसकी लिखी बता नहीं सकता|
लिखा तकदीर मे तेरी क्या,तू क्या जाने
जो लिखा बदलवा नहीं सकता|
ध्यान रख कोई और है दुनिया चलाने वाला
बिना मर्जी के हाथ हिला नहीं सकता|
समझते थे कुछ लोग खुद को, खुदा बन गए
कहाँ खो गए बता नहीं सकता|
ना कर गुरुर अपनी ताकत पर नादान
साँसों की गिनती गिना नहीं सकता|

डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२

maun rahkar

मेरी आवाज़....
आवाज़ जो मुल्क की बेहतरी के लिए है
कोई दबा नहीं सकता|
दीवार जो मेरी आवाज़ रोक सके
कोई बना नहीं सकता|
जब जब चाहा जालिमों ऩे, आवाज़ दबी हो
किस्सा कोई बता नहीं सकता|
क़त्ल कर सकते हो जिस्म का ए कातिल
विचारों को कोई दबा नहीं सकता|
खिलेगा कोई फूल उपवन मे देखना उसको
... खुशबु को कोई चुरा नहीं सकता|
कहाँ से पाला भ्रम अमर होने का,सियासतदानो
मौत से कोई पार पा नहीं सकता|
दबाओ के कब तलक मेरी आवाज़ दरिंदों
हवाओं को कोई बाँध नहीं सकता|
सजा कर एक परिंदा पिंजरें मे ,जाने क्या समझे
परिंदों से गगन खली रह नहीं सकता|
उड़ेगा बाज़ जब आसमाँ के सीने पर
मौत किसकी लिखी बता नहीं सकता|
लिखा तकदीर मे तेरी क्या,तू क्या जाने
जो लिखा बदलवा नहीं सकता|
ध्यान रख कोई और है दुनिया चलाने वाला
बिना मर्जी के हाथ हिला नहीं सकता|
समझते थे कुछ लोग खुद को, खुदा बन गए
कहाँ खो गए बता नहीं सकता|
ना कर गुरुर अपनी ताकत पर नादान
साँसों की गिनती गिना नहीं सकता|

डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२

Friday, April 13, 2012

viklangata

विकलांग.....
मेरी प्रेरणा सदैव वो लोग बने हैं
जो विकलांग होकर भी
भीड़ से आगे चले हैं|
मेरी प्रेरणा बने हैं.....
विकलांगता जिनके लिए अभिशाप थी,
अभिशाप की बैशाखियाँ तोड़ कर
जो आगे बढे हैं,
मेरी प्रेरणा बने हैं....
विकलांगता को जिन्होंने ललकारा है,
आत्मशक्ति संभाला है
अपने निश्चय पर अड़े हैं|
मेरी प्रेरणा बने हैं....
विकलांगता को नया अर्थ दे डाला है,
शक्ति का सृजन क्रियात्मक कर डाला है
आज राजपथ पर खड़े हैं|
मेरी प्रेरणा बने हैं....
विकलांगता अब घबराने लगी है
स्वाभिमान से बचने लगी है
जब से वो गद्दीनशी हुए हैं |
मेरी प्रेरणा बने हैं....
विकलांगता अब बेमानी हो गई है
उनकी पहचान सफलता की कहानी हो गई है
आज मंजिलों से आगे वो बढे हैं |
मेरी प्रेरणा बने हैं....
डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२
'विद्या लक्ष्मी निकेतन'
५३-महालक्ष्मी एन्क्लेव ,
मुज़फ्फरनगर-२५१००१

Sunday, April 8, 2012

muflisi

हाले मुफलिसी किसी से छिपाते नहीं,
अपनी गैरत को कमजोर बनाते नहीं|
माँगते हैं दुआएं खुदा से इतनी,
मुफलिसी मे जीने की कुव्वत अता करे|
मुफलिसी मे अक्सर खुदा की याद आती है,
दौलत की हबस खुदा से दूर ले ज़ाती है|

डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२

pustak

पुस्तक ............

ज्ञान है,विज्ञानं है ,अध्यातम है पुस्तक,
सृष्टि के कण -कण का प्राण है पुस्तक|
देव ,दानव,किन्नरों की पहचान है पुस्तक,
माँ,बहन ,बेटी का सम्मान है पुस्तक|
मंदिर मे गीता, रामायण,पुराण है पुस्तक,
मस्जिद,गुरूद्वारे,चर्च की भी शान है पुस्तक|
बीते हुए युगों की दास्तान है पुस्तक,
... अतीत है,भविष्य है,वर्तमान है पुस्तक|
कर्मों का लेखा -जोखा,निदान है पुस्तक,
जीवन के पल-पल का विधान है पुस्तक|
इज्ज़त है,आबरू है,मेरा ईमान है पुस्तक,
पूजा,पाठ,धर्म-कर्म,दान है पुस्तक,
ईश्वर की भक्ति का गुणगान है पुस्तक|
मेहनत का फल मिलता,सम्मान है पुस्तक,
चोर,उच्चकों,बेईमानों का अपमान है पुस्तक|
राणा,शिव और लक्ष्मी की शान है पुस्तक,
राधा और मीरा के प्रेम की,शान है पुस्तक|
वेद,उपनिषद की बात,पुराण है पुस्तक,
सत्य की विजय गाथा,निर्वाण है पुस्तक|
अन्तरिक्ष पाने की चाह,अनुसंधान है पुस्तक,
विजय ध्वज फैराना है,अभियान है पुस्तक|
चिड़िया की आँख का संधान है पुस्तक,
मनुष्य के चरित्र का निर्माण है पुस्तक|
दादा और पिता का अभिमान है पुस्तक,
"कुछ तो बाकी रह गया",नाम है पुस्तक|

डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२

Thursday, April 5, 2012

rajniti ka khel

राजनीति का खेल.....

चोरों और सिपाहियों का यह कैसा गठबंधन है,
चंद रुपैयों कि खातिर,एक दूजे का अभिनन्दन है|
तू मुझे बचा,मैं तुझे,हम सब मौसेरे नंदन,
देख मुफ्त का माल घिस रहे सरे चन्दन|
चन्दन लगा ललाट पर,बन गए पोंगा पंडित,
राजनीति के खेल मे आनंदम-आनंदम|

डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२

dahej

दहेज़

दहेज़ की समस्या को उन्होंने ,ऐसे लिया सहेज,
बिन विवाह संग रहो,शर्म करो नहीं लेश|
शर्म करो नहीं लेश,जब चाहो पति/पत्नी बदलो,
यौवन का रस पियो नित नया,सुखी रहो बिन दहेज़|
बन कर रहो दोस्त,शादी से करो परहेज,
चाहे मर जाओ भूखे,कभी मांगो नहीं दहेज़|
डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२