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Tuesday, July 9, 2013

angreji ki baat

कुछ बात उन मित्रों से जो हर वक़्त अंग्रेजी का गुणगान करते हैं ,माँ को मॉम तथा पिताजी को डैड कहते हैं , फेस बुक पर आते ही हाय से शुरू होंगे , दुनिया की कोई भी भाषा सीखो मगर अपनी भाषा,राष्ट्र भाषा पहले सीखो ,उस पर गर्व करो .....

अंग्रेजी का परचम फहराते जो घर घर में ,
उसको ही महान बताते जो सारे जग में
उनको मैं अंग्रेजी का सार बताना चाहता हूँ ,
भूली बिसरी अंग्रेजी की औकात बताना चाहता हूँ ।

अंग्रेजी तो अंग्रेजों के घर भी पिछड़ों की भाषा थी ,
फ्रेंच में लिखना पढ़ना ,सबकी अभिलाषा थी
आज भी अंग्रेजी का आधार ,फ्रेंच ही भाषा है ,
वर्तमान में अंग्रेजी नहीं बनी विश्व की भाषा है ।

चालीस प्रतिशत शब्द फ्रेंच के इसमे शामिल,
व्याकरण का अंग्रेजी को कोई बोध नहीं है ।
नहीं लिखे गए बाइबिल और ग्रन्थ अंग्रेजी में ,
नहीं पूर्व का साहित्य से इसका कोई नाता है ।

डॉ अ कीर्तिवर्धन

3 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन चर्चा मे है मेट्रो - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

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