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Saturday, February 15, 2014

muktak-vah daur kuchh aur tha jab maa ki god thi

वह दौर कुछ और था, जब माँ की गोद थी,
आँचल की छाँव में, मुझको सुलाती थी।
पिलाती थी दूध मुझे, अपनी ममता से माँ,
सोती थी गीले में, मुझे सूखे में लिटाती थी।

डॉ अ कीर्तिवर्धन

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